Breaking News
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिजली उत्पादन पर टैक्स नहीं लगा सकती राज्य सरकार
इस आसान घरेलू ड्रिंक से पाएं सिरदर्द से राहत, जानें बनाने की विधि
सिक्किम के लोगों ने अपने व्यवहार और देशप्रेम से जीता पूरे देश का दिल- पीएम मोदी
माइकल जैक्सन की बायोपिक ‘माइकल’ ने मचाया धमाल, वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर तोड़े रिकॉर्ड
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने शिक्षाविद ललित मोहन जोशी को किया सम्मानित
कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने चयनित 44 कनिष्ठ सहायकों को सौंपे नियुक्ति पत्र
देहरादून के विकास का नया ब्लूप्रिंट, 968 करोड़ के बजट से शहर को मिलेगा आधुनिक स्वरूप
मुख्यमंत्री धामी ने प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं लोकसभा सांसद हेमा मालिनी से की शिष्टाचार भेंट
“पौड़ी प्रगति पोर्टल” का विधिवत शुभारंभ, विकास कार्यों की निगरानी होगी अब डिजिटल

देहरादून में राज्य का पहला ‘आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर’ शुरू

भिक्षावृत्ति से मुक्त बच्चों को मिल रही शिक्षा, संगीत और तकनीकी प्रशिक्षण की नई दिशा

देहरादून। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी सविन बंसल के सतत प्रयासों से देहरादून में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल साकार हो रही है। शहर में भिक्षावृत्ति और बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए बच्चों को अब शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, और यह कार्य राज्य के पहले आधुनिक इन्टेंसिव केयर शेल्टर के माध्यम से किया जा रहा है।

साधुराम इंटर कॉलेज परिसर में स्थापित इस मॉडल शेल्टर में बच्चों को न सिर्फ औपचारिक शिक्षा दी जा रही है, बल्कि उन्हें योग, संगीत, खेल, नाटक, चित्रकला और कंप्यूटर शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। यहां हर दिन 25-30 बच्चे कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। अब तक 19 बच्चों का स्कूलों में दाखिला भी कराया जा चुका है।

जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा तैयार किए गए विशेष माइक्रोप्लान के तहत इस शेल्टर को युद्धस्तर पर विकसित किया गया है। यहां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विशेषज्ञ शिक्षक और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार योगदान दे रही हैं।

शेल्टर में बच्चों के लिए भोजन, स्वास्थ्य जांच, कंप्यूटर लैब, संगीत कक्ष जैसे सभी बुनियादी और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इस पहल से न केवल बच्चों की शिक्षा में रुचि बढ़ रही है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हो रहा है।

इस अभिनव प्रयास को राज्यभर में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो बाल अधिकारों और शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड की नई सोच को दर्शाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top