Breaking News
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के देहरादून दौरे को लेकर सुरक्षा चाक-चौबंद, शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू
SDRF की त्वरित कार्रवाई, नदी किनारे पत्थरों में फंसे व्यक्ति का किया सफल रेस्क्यू
प्रसिद्ध निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
अवैध प्लॉटिंग और रियल एस्टेट अनियमितताओं पर कसेगा शिकंजा, रेरा में बड़े सुधारों की तैयारी
पित्थुवाला खुर्द में अवैध प्लॉटिंग पर चला एमडीडीए का बुलडोजर
प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु से ओलंपिक पदक विजेता मैरी कॉम ने की शिष्टाचार भेंट
कोट और देवल में फूलों व सब्जियों की खेती से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था- जिलाधिकारी
अनिष्ट होने का भय दिखाकर पूजा पाठ के नाम पर आभूषण ठगने वाला ठग बाबा आया दून पुलिस की गिरफ्त में
बार-बार खाली पेट डकार आना कहीं किसी बीमारी का संकेत तो नहीं? जानिए इसके कारण

भाषाई नफरत से बचे महाराष्ट्र, नहीं तो थम जाएगा विकास- राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन

मराठी बनाम हिंदी विवाद पर बोले राज्यपाल – विविधता ही हमारी ताकत, हर भाषा का हो सम्मान

मुंबई। महाराष्ट्र में चल रहे भाषा विवाद को लेकर राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भाषाई आधार पर फैल रही नफरत न केवल सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ेगी, बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास और निवेश पर भी प्रतिकूल असर डालेगी। राज्यपाल ने सभी से संयम बरतने और भाषाओं को लेकर सम्मान का भाव रखने की अपील की।

एक कॉफी टेबल बुक के विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए राज्यपाल राधाकृष्णन ने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर आप मुझ पर हमला करें तो क्या मैं तुरंत मराठी में बात करने लगूंगा?” उन्होंने आगाह किया कि यदि भाषाई टकराव को बढ़ावा दिया गया तो राज्य में निवेशक पीछे हट सकते हैं और इसका सीधा असर विकास पर पड़ेगा।

राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि तमिलनाडु में सांसद रहने के दौरान उन्होंने देखा कि एक समूह ने दूसरे समूह पर हमला किया क्योंकि वे तमिल में बात नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मैं खुद हिंदी नहीं समझता, यह मेरे लिए एक चुनौती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दूसरों की भाषा का अनादर किया जाए। हमें विविध भाषाओं को सीखने और अपनी मातृभाषा पर गर्व करने की जरूरत है।”

राज्यपाल की इस टिप्पणी पर शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि राज्य में भाषाई भेदभाव जैसी कोई स्थिति नहीं है। साथ ही उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी से बचने की बात कही।

महाराष्ट्र में भाषा विवाद क्या है?
अप्रैल में महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य विषय बनाए जाने की घोषणा की थी, जिसे लेकर मराठी समर्थक संगठनों ने विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदी थोप रही है। बाद में सरकार ने निर्णय में आंशिक संशोधन करते हुए हिंदी को तीसरी भाषा बताया, लेकिन एक शर्त जोड़ी गई कि दूसरी भाषा के विकल्प के लिए कम से कम 20 छात्रों का सामूहिक आवेदन होना जरूरी होगा, जिसे शिक्षा विशेषज्ञ अव्यावहारिक मानते हैं।

इस विवाद के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं द्वारा गैर-मराठी बोलने वालों पर हिंसक घटनाएं भी सामने आईं। मुंबई और पुणे में ऐसे मामले दर्ज किए गए, जहां मराठी न बोलने पर दुकानदारों और आम नागरिकों पर हमले हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top