Breaking News
विधानसभा निर्वाचन-2027ः देहरादून के 12,500 दिव्यांग मतदाताओं की होगी मतदाता सूची में मैपिंग
विधानसभा निर्वाचन-2027ः देहरादून के 12,500 दिव्यांग मतदाताओं की होगी मतदाता सूची में मैपिंग
नेपाल में दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर, भारतीय नागरिक की मौत, एक घायल
नेपाल में दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर, भारतीय नागरिक की मौत, एक घायल
ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा
ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा
राइज एंड फॉल 2 को मिला पहला फाइनलिस्ट, शहजाद पूनावाला ने मारी बाजी
राइज एंड फॉल 2 को मिला पहला फाइनलिस्ट, शहजाद पूनावाला ने मारी बाजी
अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का बुलडोजर, दो प्रतिष्ठान सील
अवैध प्लॉटिंग पर एमडीडीए का बुलडोजर, दो प्रतिष्ठान सील
बद्रीनाथ हाईवे पर नरकोटा में 100 मीटर गहरी खाई में गिरी स्कॉर्पियो, चालक घायल
बद्रीनाथ हाईवे पर नरकोटा में 100 मीटर गहरी खाई में गिरी स्कॉर्पियो, चालक घायल
स्वरोजगार की राह पर बढ़ते कदम, हुनर और मेहनत से घर बैठे बना रहीं आत्मनिर्भर पहचान
स्वरोजगार की राह पर बढ़ते कदम, हुनर और मेहनत से घर बैठे बना रहीं आत्मनिर्भर पहचान
जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने सुनीं 29 शिकायतें, अधिकांश का मौके पर निस्तारण
जनता दर्शन में जिलाधिकारी ने सुनीं 29 शिकायतें, अधिकांश का मौके पर निस्तारण
जन समाधान दिवस में 110 से अधिक शिकायतें प्राप्त, अपर जिलाधिकारी एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट ने सुनीं जनसमस्याएं
जन समाधान दिवस में 110 से अधिक शिकायतें प्राप्त, अपर जिलाधिकारी एवं संयुक्त मजिस्ट्रेट ने सुनीं जनसमस्याएं

बिना सिगरेट पीए भी फेफड़े हो सकते हैं खराब, जानें छिपे खतरे

बिना सिगरेट पीए भी फेफड़े हो सकते हैं खराब, जानें छिपे खतरे

आमतौर पर फेफड़ों की बीमारियों को धूम्रपान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सिगरेट छुए भी आपके फेफड़े खतरे में हो सकते हैं। खासकर 30 की उम्र से पहले ही अब युवाओं में भी फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

लखनऊ स्थित एक अस्पताल में पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश सिंह के अनुसार, सिर्फ तंबाकू से दूरी ही फेफड़ों को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रदूषित हवा, घरेलू धुआं, अगरबत्ती, किचन गैस का धुआं, यहां तक कि रूम फ्रेशनर और सेंटेड कैंडल्स भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

WHO की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण से हर साल करीब 70 लाख लोगों की जान जाती है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण जैसे PM2.5 और NO₂ सीधे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं, लैंसेट के अध्ययन में पाया गया कि लकड़ी या गोबर से खाना बनाने वाले घरों में रहने वालों को सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

CDC के मुताबिक, पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं में सांस लेने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा 20–30% तक बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि लोग नियमित रूप से श्वसन व्यायाम करें, प्रदूषण से बचें और साफ-सुथरे वातावरण में रहें ताकि फेफड़ों की कार्यक्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top