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आयुर्वेद कोर्सों में दाखिले की रफ्तार धीमी, परिषद के सामने सीटें भरने की चुनौती

अब 42 साल तक के अभ्यर्थी भी कर सकेंगे आयुर्वेद कोर्स में दाखिला

देहरादून। उत्तराखंड में इस साल आयुर्वेद पैरामेडिकल कोर्सों में दाखिले की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है। भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तराखंड द्वारा संचालित इन कोर्सों में अब तक केवल 600 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया है, जबकि प्रदेश के 26 आयुर्वेद कॉलेजों में करीब 3100 सीटें उपलब्ध हैं।

परिषद को उम्मीद थी कि आयु सीमा बढ़ाए जाने के बाद दाखिलों की संख्या में वृद्धि होगी, लेकिन फिलहाल स्थिति विपरीत दिख रही है। अब प्रवेश की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर तय की गई है, और नवंबर के पहले सप्ताह में काउंसलिंग की जाएगी।

आयु सीमा में बड़ी राहत — अब 42 वर्ष तक के अभ्यर्थी कर सकते हैं आवेदन

इस बार परिषद ने छात्रों को राहत देते हुए प्रवेश के लिए आयु सीमा 25 वर्ष से बढ़ाकर 42 वर्ष कर दी है। यह नियम आयुर्वेद फार्मासिस्ट, नर्सिंग, पंचकर्म सहायक, टेक्नीशियन, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सहायक जैसे सभी कोर्सों पर लागू होगा। परिषद का मानना है कि इससे अधिक उम्र के वे अभ्यर्थी भी अवसर पा सकेंगे जो पहले पात्रता से बाहर रह जाते थे।

बीते साल भी खाली रह गईं थीं आधी से अधिक सीटें

पिछले शैक्षणिक सत्र में भी आयुर्वेद पैरामेडिकल कोर्सों की आधे से ज्यादा सीटें खाली रह गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में एलोपैथिक और मॉडर्न हेल्थ एजुकेशन की ओर झुकाव बढ़ने से पारंपरिक चिकित्सा कोर्सों में रुचि कम हो रही है।

परिषद को दाखिला बढ़ाने की उम्मीद

परिषद की रजिस्ट्रार नर्मदा गुसाईं ने बताया कि आवेदन की तिथि बढ़ाने और आयु सीमा में छूट से छात्रों की संख्या में सुधार की संभावना है। उन्होंने कहा, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि दिवाली के बाद आवेदनों की संख्या बढ़ेगी। नवंबर के पहले सप्ताह में काउंसलिंग पूरी कर कॉलेजों का आवंटन कर दिया जाएगा।”

प्रदेश में 26 कॉलेज, 3100 सीटें

उत्तराखंड में भारतीय चिकित्सा परिषद से मान्यता प्राप्त 26 आयुर्वेद पैरामेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें कुल 3100 सीटें हैं, लेकिन छात्रों की संख्या में गिरावट से ये सीटें भरना परिषद के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं।

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