Breaking News
पौड़ी में राजस्व समीक्षा बैठक, पुराने वादों के शीघ्र निस्तारण और वसूली में तेजी के निर्देश
पौड़ी में राजस्व समीक्षा बैठक, पुराने वादों के शीघ्र निस्तारण और वसूली में तेजी के निर्देश
नशे के खिलाफ सख्ती: संवेदनशील इलाकों की होगी GIS मैपिंग, पोस्त की खेती पर छापेमारी के निर्देश
नशे के खिलाफ सख्ती: संवेदनशील इलाकों की होगी GIS मैपिंग, पोस्त की खेती पर छापेमारी के निर्देश
स्वच्छ एवं कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में मजबूत पहल, नए नियमों के क्रियान्वयन पर जोर
स्वच्छ एवं कचरा-मुक्त उत्तराखंड की दिशा में मजबूत पहल, नए नियमों के क्रियान्वयन पर जोर
पेट दर्द और सूजन को न करें नजरअंदाज, उभार दिखे तो हो जाएं सतर्क, हो सकता है हर्निया
पेट दर्द और सूजन को न करें नजरअंदाज, उभार दिखे तो हो जाएं सतर्क, हो सकता है हर्निया
अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, तेल टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा टकराव
अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, तेल टैंकरों पर हमले के बाद बढ़ा टकराव
‘हैवान’ को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 11 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म
‘हैवान’ को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 11 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म
नितिन नबीन के कुमाऊं दौरे को लेकर तैयारियां तेज, मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों के साथ की बैठक
नितिन नबीन के कुमाऊं दौरे को लेकर तैयारियां तेज, मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों के साथ की बैठक
जर्जर भवनों का होगा सर्वे, डीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
जर्जर भवनों का होगा सर्वे, डीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
पौधे नहीं, भविष्य की हरियाली तैयार कर रहा एमडीडीए
पौधे नहीं, भविष्य की हरियाली तैयार कर रहा एमडीडीए

जंगलों में आग, तबाही के बाद ही होते हैं बचाव और सुरक्षा को लेकर सचेत

जंगलों में आग, तबाही के बाद ही होते हैं बचाव और सुरक्षा को लेकर सचेत

उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की यह कोई पहली या नई घटना है। हर वर्ष गर्मी में कई जगहों पर आग लगने की वजह से आसपास का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस बार तापमान में बढ़ोतरी के साथ अभी ही राज्य में पांच सौ से ज्यादा आग लगने के मामले सामने आ चुके हैं।

किसी हादसे का सबसे बड़ा सबक यह होना चाहिए कि ऐसे इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में वैसे हालात से बचा जा सके। हैरानी की बात है कि उत्तराखंड के जंगलों में हर वर्ष आग लगने और उससे व्यापक नुकसान होने की घटनाओं के बावजूद इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी जाती। इस बार फिर नैनीताल और उसके आसपास के जंगलों में आग लगी और फैल कर खतरनाक शक्ल ले चुकी है।

आग से पर्यटन कारोबार पर भी पड़ा असर
बीते दो-तीन दिनों में कुमाऊं के जंगलों में पच्चीस से ज्यादा जगहों पर आग लग गई। वनाग्नि की इन घटनाओं में जहां करीब चौंतीस हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, वहीं नैनीताल और आसपास के इलाकों में पर्यटन कारोबार पर भी इसका विपरीत असर पड़ा है। आग बुझाने के लिए भीमताल के पानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उस झील में पर्यटन गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। इससे इलाके की अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।

नैनीताल के जंगलों में लगी आग हुई बेकाबू, मदद के लिए जमीन पर उतरी सेना, हेलीकॉप्टर भी बुलाए गए
ऐसा नहीं कि उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की यह कोई पहली या नई घटना है। हर वर्ष गर्मी में कई जगहों पर आग लगने की वजह से आसपास का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस बार तापमान में बढ़ोतरी के साथ अभी ही राज्य में पांच सौ से ज्यादा आग लगने के मामले सामने आ चुके हैं। विडंबना है कि प्रत्यक्ष आशंका और खतरा होने के बावजूद गर्मी की शुरुआत के पहले सरकार की ओर से आग लगने के लिहाज से संवेदनशील जगहों पर बचाव और आग को फैलने से रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा सके।

जंगल में कुछ ऐसे खाली क्षेत्र तैयार किए जा सकते हैं, जहां जलाशय बनाए जा सकते हैं कि अगर किसी क्षेत्र में आग लगे, तो उसे फैलने से रोका जा सके और बुझाने में मदद मिले। इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि क्या आग लगने की घटनाओं में कुछ अराजक तत्त्वों का हाथ है! मगर आम हो चुकी वनाग्नि की घटनाओं के बावजूद सरकार को इस ओर ध्यान देना शायद जरूरी नहीं लगता। नतीजतन, हर वर्ष राज्य में जंगलों का बड़ा हिस्सा वनाग्नि से तबाह होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top