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बार-बार मांसपेशियों में खिंचाव? सिर्फ थकान नहीं, यह भी हो सकता है कारण

बार-बार मांसपेशियों में खिंचाव? सिर्फ थकान नहीं, यह भी हो सकता है कारण

बार-बार पैरों में ऐंठन, मांसपेशियों में खिंचाव या सामान्य काम के बाद जरूरत से ज्यादा थकान महसूस होती है तो इसे सिर्फ कमजोरी मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार शरीर में जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी ऐसे लक्षणों की वजह बन सकता है। इन्हीं महत्वपूर्ण खनिजों में पोटैशियम शामिल है, जो मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होता है।

हालांकि, पैरों में क्रैंप या कमजोरी होने का मतलब हर बार पोटैशियम की कमी होना नहीं है। पानी की कमी, अधिक व्यायाम, लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स में असंतुलन भी ऐसी परेशानियां पैदा कर सकते हैं। इसलिए लगातार या गंभीर लक्षणों की स्थिति में सही कारण जानना जरूरी है।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है पोटैशियम?

पोटैशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट के रूप में काम करता है और कई जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। यह नसों के सामान्य कामकाज, मांसपेशियों के संकुचन और शरीर में तरल पदार्थ के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। हृदय की सामान्य धड़कन के लिए भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन महत्वपूर्ण होता है।

पोटैशियम का स्तर बहुत कम या बहुत अधिक होना दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसलिए बिना जांच के पोटैशियम सप्लीमेंट लेना उचित नहीं माना जाता।

बार-बार क्रैंप हो तो सावधान

पोटैशियम का स्तर कम होने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में कमजोरी, खिंचाव या ऐंठन की शिकायत हो सकती है। खासकर यदि ये समस्या बार-बार होती है या इसके साथ मांसपेशियों में कमजोरी भी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि क्रैंप के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। अत्यधिक व्यायाम, शरीर में पानी की कमी, लंबे समय तक खड़े रहना या बैठना और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन भी इसकी वजह बन सकता है।

हर समय थकान भी हो सकती है संकेत

पोटैशियम की गंभीर कमी की स्थिति में मांसपेशियों की कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में रोजमर्रा के सामान्य काम भी पहले की तुलना में अधिक मुश्किल लग सकते हैं।

लेकिन लगातार थकान के पीछे नींद की कमी, तनाव, पोषण की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं। यदि कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है या धीरे-धीरे बढ़ रही है तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

ज्यादा पसीना आने पर रखें खास ध्यान

गर्मी में लंबे समय तक रहने या ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। अत्यधिक पसीना आने के साथ कमजोरी, चक्कर या मांसपेशियों में ऐंठन हो तो शरीर के तरल और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर ध्यान देना जरूरी है।

सामान्य परिस्थितियों में संतुलित आहार और पर्याप्त तरल पदार्थ शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। लेकिन लगातार या गंभीर लक्षण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

जांच के बाद ही लें सप्लीमेंट

यदि डॉक्टर को पोटैशियम की कमी का संदेह होता है तो रक्त जांच के जरिए शरीर में इसके स्तर की जांच की जा सकती है। कमी पाए जाने पर डॉक्टर खान-पान में बदलाव या जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।

केले समेत कई खाद्य पदार्थों में पोटैशियम पाया जाता है, लेकिन केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने या खुद से पोटैशियम की गोलियां लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। खासकर किडनी से जुड़ी समस्या वाले लोगों में पोटैशियम सप्लीमेंट का इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। लगातार ऐंठन, कमजोरी, चक्कर या अन्य परेशानियां होने पर चिकित्सक से सलाह लें। केवल इन लक्षणों के आधार पर पोटैशियम की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

(साभार)

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