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समयबद्ध न्याय से रूक सकेंगे महिलाओं के प्रति अपराध  

समयबद्ध न्याय से रूक सकेंगे महिलाओं के प्रति अपराध  

डॉ जगमति
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।  देश का एक भी कोना, स्त्रियों के साथ अमानवीयता को लेकर अछूता नहीं है।  हर रोज देश के किसी न किसी कोने से महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म और हत्या जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।  ऐसे में यह प्रश्न उठाना स्वाभाविक है कि आखिर किस मानसिकता के साथ ऐसे घृणित कृत्य को अंजाम दिया जाता है।  यदि हम गहराई में जाएं, तो पायेंगे कि इस तरह के कुकृत्यों के पीछे एक ऐसी मानसिकता काम करती है, जो महिलाओं, बच्चियों को मनुष्य न मान महज एक वस्तु मानती है।  ऐसी मानसिकता के विकसित होने का कारण देश में एक भी ऐसी संस्था का न होना है, जो नौजवानों का मार्गदर्शन कर सके।  इसके अतिरिक्त, देश में यौन शिक्षा को लेकर, यौन संबंधों को लेकर विमर्श में एक हिचकिचाहट है।

समाज में इन विषयों पर बातचीत करना एक तरह से प्रतिबंधित है।  ऐसे में यौन संबंधों के बारे में छुप-छुपाकर जानकारी प्राप्त की जाती है।  इससे एक विकृत मानसिकता विकसित होती है।  आजकल स्मार्टफोन व इंटरनेट की पहुंच लगभग हर जगह हो गयी है। और इनके जरिये बड़ी मात्रा में अश्लील सामग्री किशोरों, युवाओं व बच्चों तक पहुंच रही है।  इन सामग्रियों पर किसी तरह की कोई रोक भी नहीं है।  इस तरह की सामग्री नौजवानों को अपराध के लिए उकसाती है।  जब युवाओं के पास यौन संबंधों को लेकर कोई खास जानकारी नहीं है, न ही इस विषय पर कोई विमर्श ही होता है, ऐसा वातावरण अपराध की मानसिकता विकसित करने में मददगार साबित होता है।  जिनके पास पैसा है, वे पैसे के बल पर इस तरह के कार्य कर लेते हैं।  पर जिनके पास पैसा नहीं है, न ही उसे अपनी इच्छाएं पूरी करने का रास्ता पता है, ऐसा व्यक्ति चोरी-छुपे इस तरह के काम करता है।  इसके लिए वह अपराध का रास्ता चुनता है।  चूंकि महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं, बच्चियां तो प्रतिरोध की स्थिति में ही नहीं होती हैं, सो अपराधियों के लिए उनको निशाना बनाना आसान हो जाता है।

देश में इस तरह की जो मानसिकता बन रही है, उसके तार कई जगहों से जुड़े हुए हैं।  जब तक उन तमाम जगहों पर काम नहीं किया जायेगा, तब तक लोगों की मानसिकता में सुधार नहीं होगा और अपराध व महिलाओं के प्रति असुरक्षा बढ़ती रहेगी।  हमारे देश में राजनीति और अपराध का गठजोड़ बहुत गहरा है।  सत्ता अपराधियों को संरक्षण देती है, सो जघन्य अपराधियों को भी बेल मिल जाती है।  ऐसे में लोगों के बीच संकेत तो यही जाता है कि अपराध के बाद राजनीतिक संरक्षण लेने से आप बच जायेंगे।  इससे दूसरे अपराधियों को भी हिम्मत मिलती है।  अपराधियों को सरकारी संरक्षण मिलने के संकेत समाज में नकारात्मक जाते हैं।  लोगों के मन में कानून-व्यवस्था का जो डर होता है, वह समाप्त हो जाता है।  किसी पर कोई अंकुश नहीं रह जाता है।  इस कारण भी अपराध बढ़ते हैं।  मुझे मीडिया से भी शिकायत है।  वह महिलाओं को एक व्यक्तित्व की बजाय एक सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में पेश करती है।  इस तरह के अपराध के लिए नशाखोरी भी बड़ी वजह है।  बेरोजगारी, खेती के संकट ने भी नशाखोरी को जन्म दिया है, जिसने महिलाओं के प्रति अपराध को बढ़ाया है।  काम न होने के कारण युवा नशे को गले लगा लेता है।  नशे में होशो-हवास खोने के बाद वह अपराध व हैवानियत पर उतर आता है।

इन अपराधों को रोकने के लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना होगा।  इसकी सबसे बड़ी जवाबदेही सरकार के ऊपर है।  उसे युवाओं को व्यस्त रखने के उपाय करने होंगे।  जब युवा व्यस्त होंगे तब रचनात्मक कार्यों में अपना मन लगायेंगे, परंतु यदि उनके पास ढेर सारा खाली समय होगा, तो वे मोबाइल पर उल्टी-सीधी चीजें देखेंगे और अपराध के दलदल में उतरगे।  अपराध पर रोक के लिए समाज और सरकार को यह प्रयास करना चाहिए, कि वे बच्चों को ऐसा खाद-पानी दें, जिससे वे एक अच्छे नागरिक के रूप में विकसित हों।  हमें महिलाओं को एक मनुष्य की तरह देखने का नजरिया विकसित करना होगा और इसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा।  साथ ही सरकार को पोर्नोग्राफी पर, अश्लील फिल्मों पर रोक लगाने की जरूरत है।  आपसी सहयोग से मनुष्य के विकास के लिए स्वस्थ वातावरण निर्मित करना होगा।

महिलाओं को भी संगठित होना होगा और अपने लिए सुरक्षित वातावरण के निर्माण के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी होगी, अपराधियों को सजा दिलवानी होगी।  आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा रही हैं, परंतु उनके लिए बाहरी वातावरण सिकुड़ता जा रहा है, क्योंकि उनके लिए असुरक्षा बनी हुई है।  यूनिवर्सिटी, कॉलेज महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मित करे, पुलिस अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करे, समय पर न्याय मिले।  जब ऐसा होगा, तब जाकर महिलाओं के प्रति अपराध रुकेंगे और वे सुरक्षित हो पायेंगी।

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