Breaking News
पौधे नहीं, भविष्य की हरियाली तैयार कर रहा एमडीडीए
पौधे नहीं, भविष्य की हरियाली तैयार कर रहा एमडीडीए
शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री
शिक्षक केवल विद्यार्थी का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है- मुख्यमंत्री
दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान
दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों को मिलेगा सम्मान
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से की शिष्टाचार भेंट
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री से की शिष्टाचार भेंट
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
बीरोंखाल में श्रमिक पंजीकरण शिविर, सैकड़ों श्रमिकों ने लिया हिस्सा
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
देहरादून-मसूरी मार्ग पर पानीवाला बैंड के पास गहरी खाई में मिला व्यक्ति का शव
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
‘मिर्जापुर द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, 4 दिनों में पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत
मुख्यमंत्री धामी से मिले नन्हे पर्वतारोही रियांश पंत और प्रिशा रावत

पिरूल के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि से स्थानीय लोगों को मिल रहा आजीविका का नया अवसर

पिरूल के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि से स्थानीय लोगों को मिल रहा आजीविका का नया अवसर

सीएम धामी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश भर में संचालित है पिरूल लाओ, पैसे पाओ मिशन

धामी सरकार ने राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए पिरूल को जंगल से हटाने का फैसला लिया है

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मुख्य उद्देश्य जंगल की आग को रोकना और नियंत्रित करना है। सरकार की इस नई पहल में पिरूल को जंगल से हटाने के साथ- साथ स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने की योजना है। मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर राज्य में ‘पिरूल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन को शुरू कर दिया गया है जिसके तहत पिरूल कलेक्शन सेंटर पर 50 रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदे जाएंगे। जबकि इससे पहले पिरूल की कीमत काफ़ी कम 2 से 3 रुपए प्रति किलो थी।

पिरूल के मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि से राज्य में पिरूल के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं को तैयार करने वाले काश्तकारों को भी इसका फायदा मिलेगा। एक और जहां वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाया जाएगा वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए भी यह आजीविका का नया साधन बनेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top