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अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ रही आयुष औषधियों की मांग, उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण जरूरी- त्रिवेन्द्र

देशभर में 18 आयुष फार्मेसियों और 7 परीक्षण प्रयोगशालाओं को मिली वित्तीय सहायता

देहरादून / नई दिल्ली। हरिद्वार से सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में आयुष मंत्रालय ने आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (AOGUSY) के तहत देशभर में हुई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने बताया कि केंद्र सरकार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 122 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ इस केंद्रीय क्षेत्र योजना का संचालन कर रही है। योजना का उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (ASU&H) औषधियों की गुणवत्ता में सुधार, परीक्षण प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण तथा विनिर्माण इकाइयों को उच्च मानकों के अनुरूप विकसित करना है।

मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस योजना के अंतर्गत देशभर में 18 आयुष फार्मेसियों और 7 औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं (DTL) को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इसके लिए कुल 40.13 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। संसद में प्रस्तुत विवरण के अनुसार कई राज्यों में आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता दी गई है।

सांसद त्रिवेन्द्र ने इस योजना के माध्यम से देश में आयुष क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आयुष औषधियों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में उनके उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की योजनाओं से आयुष क्षेत्र में शोध, विनिर्माण और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे तथा भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी।

सांसद त्रिवेन्द्र ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में देश के अधिक से अधिक राज्यों की आयुष इकाइयाँ इस योजना का लाभ उठाकर उच्च गुणवत्ता मानकों को प्राप्त करेंगी और भारत को आयुष औषधियों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान देंगी।

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