Breaking News
कृषि विभाग में अनियमितताओं के प्रकरण में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने दिए जांच के आदेश
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राज्यपाल के अभिभाषण को बताया निराशाजनक और दिशाहीन
‘महिला आयोग आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत, दूरस्थ महिलाओं को न्याय दिलाने की बड़ी पहल
मुख्यमंत्री धामी ने पेश किया ₹1.11 लाख करोड़ का बजट
इंडोनेशिया में बड़ा हादसा, भारी बारिश के कारण कचरे का विशाल ढेर ढहा, पांच लोगों की मौत
कान साफ करने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल हो सकता है खतरनाक, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
गैरसैंण में यूकेडी का प्रदर्शन, विधानसभा घेराव की कोशिश पर पुलिस से झड़प
आलिया भट्ट की आगामी फिल्म ‘अल्फा’ का पोस्टर जारी, रिलीज डेट का भी हुआ एलान
पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड देना अनिवार्य

निजी स्कूलों को चेतावनी- नियम न मानने पर रद्द हो सकती है मान्यता

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को मुफ्त बायोडिग्रेडेबल सैनेटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य और स्वच्छता, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

छात्राओं की बुनियादी सुविधाओं पर सख्त रुख

अदालत ने कहा कि स्कूलों में शौचालय और मासिक धर्म स्वच्छता की सुविधाएं सुनिश्चित करना सरकारों की जिम्मेदारी है। यदि राज्य सरकारें और संबंधित प्राधिकरण इस दिशा में विफल रहते हैं, तो उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने यह निर्देश कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए जारी किया है, जिसमें केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने पर जोर दिया गया है।

निजी स्कूलों को सख्त चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों को चेताते हुए कहा कि यदि वे छात्राओं और छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालयों की व्यवस्था नहीं करते और छात्राओं को मुफ्त सैनेटरी पैड उपलब्ध कराने में असफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। अदालत ने दो टूक कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शौचालय व्यवस्था पर भी निर्देश

शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय हों। इसके साथ ही दिव्यांग छात्रों के अनुकूल शौचालयों की उपलब्धता को भी अनिवार्य बताया गया है।

जनहित याचिका पर आया फैसला

गौरतलब है कि यह फैसला जया ठाकुर द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है, जिसमें कक्षा 6 से 12 तक की किशोर छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 10 दिसंबर 2024 को फैसला सुरक्षित रखा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top