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ईरान पर दोबारा हमला हुआ, तो इस्लामी गणराज्य अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ देगा जवाब- अराघची

दावोस से बाहर होने के बाद अराघची के तेवर सख्त, अमेरिका को सीधी धमकी

तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि ईरान पर दोबारा किसी भी तरह का सैन्य हमला हुआ, तो इस्लामी गणराज्य अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ जवाब देगा। अराघची की यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी मध्य पूर्व क्षेत्र में लगातार बढ़ा रहा है।

दावोस फोरम से बाहर किए जाने के बाद सख्त रुख
ईरान में प्रदर्शनकारियों की मौतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेल रहे अराघची को विश्व आर्थिक मंच (दावोस) में आमंत्रण नहीं दिया गया था। इसके बाद से ही ईरानी नेतृत्व के तेवर और सख्त होते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में अराघची ने अमेरिकी नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान अब किसी भी उकसावे को नजरअंदाज नहीं करेगा।

अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने हाल के दिनों में अपने लड़ाकू विमान, नौसैनिक बेड़े और अन्य सैन्य संसाधनों को एशिया से हटाकर मध्य पूर्व की ओर भेजना शुरू किया है। इसे लेकर ईरान ने आशंका जताई है कि क्षेत्र में तनाव को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है। अराघची ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में लिखे अपने लेख में कहा कि जून 2025 में ईरान ने संयम दिखाया था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

‘जंग पसंद नहीं, लेकिन मजबूरी में जवाब देंगे’
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से युद्ध के खिलाफ हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेताया कि अगर संघर्ष बढ़ता है तो उसका असर केवल ईरान और इस्राइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा क्षेत्र इसकी चपेट में आ सकता है।

अमेरिकी ठिकानों पर हमले के संकेत
अराघची के बयान से संकेत मिलते हैं कि ईरान के पास मौजूद कम और लंबी दूरी की मिसाइलें किसी भी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बन सकती हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यदि हालात बिगड़ते हैं तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है। इससे मध्य पूर्व में बड़े टकराव की आशंका और गहरा गई है।

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