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भारतीय गेंदबाज इशांत शर्मा ने रचा इतहास, लिस्ट ए क्रिकेट में पूरे किए 200 विकेट

ऋषभ पंत की गैरमौजूदगी में ईशांत को मिली दिल्ली की कमान

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज इशांत शर्मा ने घरेलू क्रिकेट में एक और अहम मुकाम हासिल कर लिया है। विजय हजारे ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में विदर्भ के खिलाफ खेलते हुए ईशांत ने लिस्ट ए क्रिकेट में अपने 200 विकेट पूरे किए। इस मैच में उन्होंने लंबे अंतराल के बाद दिल्ली टीम की कप्तानी भी संभाली और अपने अनुभव से टीम को मजबूती दी।

क्वार्टर फाइनल में रचा इतिहास

37 वर्षीय इशांत शर्मा ने मैच के 25वें ओवर में विदर्भ के सलामी बल्लेबाज अर्थव तायडे को आउट कर यह उपलब्धि हासिल की। इस विकेट के साथ ही उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में 200 विकेटों का आंकड़ा छू लिया। घरेलू क्रिकेट में यह उपलब्धि उनके लंबे और अनुशासित करियर को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट का मजबूत रिकॉर्ड

इशांत के लिस्ट ए करियर के 200 विकेटों में से 115 विकेट वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में आए हैं। उन्होंने 2007 में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था और कई वर्षों तक भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाज रहे। हालांकि 2016 के बाद से वह वनडे टीम का हिस्सा नहीं रहे, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारत के लिए 115 मैचों में 311 विकेट लेकर अपनी अलग पहचान बनाई। 2021 के बाद से वह टेस्ट टीम से बाहर हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन लगातार प्रभावशाली बना हुआ है।

सात साल बाद कप्तानी की जिम्मेदारी

इशांत शर्मा ने करीब सात साल बाद दिल्ली की कप्तानी संभाली। इससे पहले वह 2019 में सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी में टीम की कमान संभाल चुके थे। मौजूदा सीजन में भी उन्होंने गेंदबाजी में निरंतरता दिखाई है और सात मैचों में आठ विकेट लेकर टीम के लिए अहम योगदान दिया है। नॉकआउट चरण तक दिल्ली को पहुंचाने में उनका अनुभव निर्णायक साबित हुआ है।

क्यों सौंपी गई ईशांत को कप्तानी

दिल्ली टीम की कप्तानी इशांत को ऋषभ पंत की अनुपस्थिति में दी गई। पंत ग्रुप स्टेज के दौरान टीम का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान चोटिल होने के कारण वह आगे के मैचों से बाहर हो गए। वहीं, आयुष बदोनी के भारतीय टीम में चयन के चलते उपलब्ध न होने से टीम प्रबंधन ने अनुभवी ईशांत शर्मा पर भरोसा जताया।

घरेलू क्रिकेट में इशांत शर्मा की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके अनुभव और फिटनेस को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि वह अब भी भारतीय क्रिकेट के एक मजबूत स्तंभ बने हुए हैं।

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