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शशि थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर पर उठी बहस को बताया संवेदनशील मुद्दा, राजनीति से ऊपर रखी राष्ट्रीय सुरक्षा

तिरुवनंतपुरम- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में आतंकवाद पिछले तीन दशकों से चुनौती बना हुआ है और इसे अत्यधिक गंभीरता से समझने की जरूरत है। थरूर के अनुसार, आतंकवाद की जड़ें 1989-90 के आसपास जम्मू-कश्मीर से पनपीं और धीरे-धीरे यह खतरा देश के कई हिस्सों—मुंबई, पुणे और दिल्ली तक फैलता गया।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े तथ्यों की जांच अभी जारी है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। थरूर के मुताबिक, “जिम्मेदारी से काम लेते हुए यह समझना जरूरी है कि घटना क्यों हुई और आगे ऐसी स्थितियों से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।”

फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद शुरू हुई चर्चा

दरअसल, पूरा मामला तब सामने आया जब जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस ऑपरेशन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वे उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान उनके 18 लोग मारे गए और सीमा सुरक्षा को नुकसान हुआ। साथ ही उन्होंने भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार की आवश्यकता पर बात करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस संदेश को भी याद किया कि “पड़ोसी बदले नहीं जा सकते।”

थरूर बोले—पहली प्राथमिकता देशवासियों की सुरक्षा

फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी के जवाब में थरूर ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में भारत के नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद पर कठोर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही देश के व्यापक विकास लक्ष्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

रोहिणी आचार्य के राजनीति छोड़ने पर भी दिया बयान

इस दौरान थरूर से लालू यादव की बेटी और तेजस्वी यादव की बहन रोहिणी आचार्य के राजनीति से दूर होने को लेकर भी सवाल पूछा गया। उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह उनका निजी फैसला है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। थरूर ने साफ किया कि उन्होंने बिहार में चुनाव प्रचार नहीं किया, इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को लेकर टिप्पणी करना उनके लिए सही नहीं होगा।

केरल में आरएसएस कार्यकर्ता की मौत—थरूर ने निष्पक्ष जांच की मांग की

केरल में आरएसएस कार्यकर्ता की कथित आत्महत्या के मामले पर भी थरूर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि घटना की तुरंत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने भाजपा नेतृत्व से अपने अंदरूनी मामलों की भी समीक्षा करने की सलाह दी। थरूर ने मृतक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले को किसी भी हालत में राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

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