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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- करूर भगदड़ मामले की जांच अब सीबीआई करेगी

पूर्व जज अजय रस्तोगी करेंगे निगरानी

नई दिल्ली। तमिलनाडु के करूर में अभिनेता-राजनेता विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी को इस जांच की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह आदेश तमिलागा वेट्री कजगम (टीवीके) की उस याचिका पर आया है, जिसमें पार्टी ने स्वतंत्र जांच की मांग की थी। टीवीके का कहना था कि राज्य पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) पर जनता का भरोसा नहीं है और यह घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा भी हो सकती है।

टीवीके की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

टीवीके सचिव आधव अर्जुना ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि भगदड़ की जांच किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई को सौंपी जाए। पहले मद्रास हाई कोर्ट ने एसआईटी गठित की थी, लेकिन टीवीके ने उस पर सवाल उठाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को मंजूरी देते हुए रिटायर्ड जस्टिस अजय रस्तोगी को मॉनिटरिंग कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया है।

एफआईआर में टीवीके नेताओं पर गंभीर धाराएं

घटना के बाद करूर पुलिस ने टीवीके के कई पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इनमें जिला सचिव माधियाझगन, जनरल सेक्रेटरी बसी आनंद और ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी सीटीआर निर्मल कुमार शामिल हैं। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य की जान जोखिम में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

पुलिस का कहना है कि रैली में कोई खुफिया चूक नहीं थी। लेकिन विजय के देरी से पहुंचने और लंबे इंतजार के कारण भीड़ में असंतोष बढ़ गया था, जिससे भगदड़ की स्थिति बनी।

रैली में अव्यवस्था के आरोप

अधिकारियों के मुताबिक आयोजकों को निर्देश दिया गया था कि विजय की बस को निर्धारित स्थान से 50 मीटर पहले रोका जाए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। करीब 10 मिनट तक बस में ही रुकने से भीड़ बेकाबू हो गई और अफरातफरी मच गई।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि टीवीके ने अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया। पार्टी को 10,000 लोगों की भीड़ की मंजूरी दी गई थी, जबकि मौके पर 25,000 से अधिक लोग पहुंचे। पर्याप्त पानी, सुरक्षा और व्यवस्था न होने से हालात बिगड़ गए।

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