Breaking News
उत्तराखंड में जीएसटी संग्रहण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, नेट एसजीएसटी 24% बढ़ा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया अपने पद से इस्तीफा
भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला आज
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 676.23 अरब डॉलर पहुंचा, आरबीआई के ताजा आंकड़े जारी
‘जन नायकन’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दो दिन में पार किया 50 करोड़ का आंकड़ा
शिक्षक बनने का सुनहरा मौका,16 अगस्त को होगी संयुक्त बीएड-एमएड प्रवेश परीक्षा
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक
ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंसः हर युवा का भविष्य बचाना हमारी प्राथमिकता- डीएम
उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह के तथाकथित “इस्तीफे” को लेकर उठे सवाल

आपदा प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए 168 लोगों को प्रशासन ने होटलों में पहुंचाया

प्रत्येक होटल में कर्मचारियों की तैनाती, प्रभावितों की समस्याओं का हो रहा समाधान

देहरादून। आपदा प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए 168 लोगों को प्रशासन ने अस्थायी राहत के रूप में विभिन्न होटलों में ठहराया है। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पांच होटलों को अधिग्रहित कर इन्हें राहत शिविर का स्वरूप दिया है। यहां प्रभावितों के लिए भोजन, राशन और साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था की गई है। साथ ही, समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए होटलवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि मजाड़ और कालीगाड जैसे गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में सर्च व रेस्क्यू अभियान अब भी जारी है। अब तक खतरनाक इलाकों से 70 लोगों को बचाया गया था, जिसके बाद कार्लीगाड गांव से 60 प्रभावितों को हिमालयन व्यू होटल, सेरा गांव से 32 लोगों को ईरा रिजॉर्ट और कुल्हान से 76 लोगों को हिल व्यू होटल पहुंचाया गया। पहले इन लोगों को अस्थायी रूप से स्कूल भवनों में ठहराया गया था।

प्रत्येक होटल में दो-दो कर्मचारियों की तैनाती की गई है ताकि राहत कार्य सुचारू रूप से चल सके। वहीं, जिला पर्यटन विकास अधिकारी को नोडल अफसर और रायपुर के सहायक खंड विकास अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी बनाया गया है। होटल परिसरों में सफाईकर्मियों की भी तैनाती की गई है ताकि प्रभावित लोगों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। प्रशासन लगातार उनके नुकसान और आवश्यकताओं का ब्यौरा एकत्र कर रहा है, जिससे आगे मदद और पुनर्वास की दिशा में योजनाएं बनाई जा सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top